15 श्रद्धालुओं की मौत से ग्वालियर शोकाकुल, कलेक्टर-एसपी पर कार्रवाई की उठी मांग
ग्वालियर18 अक्टूबर 2026/प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में हुए दर्दनाक हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत से पूरा ग्वालियर शहर शोक और आक्रोश में डूबा हुआ है। एक ओर मृतकों के परिजनों की चीख-पुकार और घायलों के उपचार को लेकर चिंता है, तो दूसरी ओर हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने एक दुखी ग्वालियरवासी की गुहार का वीडियो सामने आया है, जो शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
वीडियो में घायलों का हालचाल जानने पहुंचे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने भीड़ के बीच एक व्यक्ति हाथ जोड़कर निवेदन करता दिखाई दे रहा है। वह सिंधिया से कहता है, ‘महाराज, कृपा करके हमारे शहर के एसपी और कलेक्टर को हटवाइए। हमारा जीवन बर्बाद हो गया। पूरे देश में हमने ऐसा एसपी कहीं नहीं देखा।’
शहर की इस पीड़ा और गुस्से को बयां करती गुहार सुनकर सिंधिया भी कुछ पल के लिए अवाक नजर आते हैं। वीडियो में वह सिर हिलाते हुए आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। हादसे के बाद प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर लोगों के भीतर पनप रहे आक्रोश की यह घटना एक तस्वीर पेश करती है।
प्रतिबंधित रास्ते पर ट्रकों के पहुंचने से उठे गंभीर सवाल
जानकारी के अनुसार, बीती रात करीब 1:30 बजे शीतला माता मंदिर मार्ग पर धान से लदे दो ट्रकों के पहुंचने के बाद भीषण हादसा हुआ। हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस रास्ते पर साइकिल तक ले जाने पर प्रतिबंध होने की बात कही जा रही है, वहां धान से लदे दो ट्रक आखिर कैसे पहुंच गए? क्या रास्ते पर यातायात प्रतिबंधों की निगरानी नहीं की जा रही थी? भारी वाहनों को रोकने के लिए तैनात व्यवस्था कहां थी? यदि मार्ग प्रतिबंधित था, तो ट्रकों को वहां प्रवेश करने से रोकने में चूक कैसे हुई?
इन सवालों के जवाब अब पुलिस और प्रशासन से मांगे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि यातायात व्यवस्था और प्रतिबंधों का प्रभावी ढंग से पालन कराया गया होता, तो शायद इस भयावह हादसे को टाला जा सकता था।
आठ पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद भी शांत नहीं हुआ आक्रोश
हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्रवाई करते हुए सीएसपी सहित आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के निर्देश दिए। हालांकि, शहर के एक बड़े हिस्से में यह मांग उठ रही है कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। लोग जिला प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारियों, विशेषकर कलेक्टर और एसपी की जवाबदेही भी तय करने की मांग कर रहे हैं।
लोगों का सवाल है कि इतने महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही के बावजूद यातायात प्रतिबंधों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या इस घटना की जिम्मेदारी तय करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी निष्पक्ष जांच नहीं होनी चाहिए?
हादसे ने व्यवस्था पर खड़े किए सवाल
शीतला माता मंदिर में हुई यह त्रासदी केवल एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं है। इसने धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था, भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण और पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने ला दिया है।
फिलहाल शहर के लोगों की प्राथमिकता घायलों के बेहतर उपचार, मृतकों के परिवारों को सहायता और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की है। साथ ही, यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन अधिकारियों की लापरवाही प्रमाणित हो, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
15 श्रद्धालुओं की मौत का दर्द ग्वालियर लंबे समय तक नहीं भूल पाएगा। अब शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और जवाबदेही तय करने के लिए सरकार आगे क्या कदम उठाती है।