ऐसा लगता है कि देशवासियों ने चीन को अपनी ही भाषा में जवाब देने का मन बना लिया है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है देशभर में चीनी सामान के विरोध की जैसे लहर सी चल पड़ी है। एक और जहां लोग स्वप्रेरणा से चीनी सामान खरीदने से परहेज करते देखे जा सकते हैं वहीं दूसरी और स्वदेशी जागरण मंच ने तो राष्ट्रीय स्वदेशी सुरक्षा अभियान चलाकर चीन निर्मित वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर पूरी तरह मोर्चा ही खोल दिया है।। मंच के कार्यकर्ता घर घर जाकर देशवासियों से भारत के खिलाफ चीन की नापाक साजिश के प्रति जनजागरण कर अपना राष्ट्रीय दायित्व निभाने का आव्हान कर रहे हैं।
स्वदेशी जागरण मंच के इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। देश के कई स्थानों पर तो लोगों ने सार्वजनिक रूप से चीनी सामान की होली जलाकर विरोध प्रदर्शन तक किये है।
उल्लेखनीय हैं कि दीपावली के मौसम में देशभर के बाजार इस समय चीनी सामान से पटे पड़े हैं। कई चीजों जैसे कि इलेक्ट्रोनिक आदि में तो चीन निर्मित सामान का जैसे एकाधिकार हो गया है और भारतीय सामान कहीं दिखाई नहीं दे रहा। ऐसी स्थिति में चीनी सामान के प्रति देशवाशियों के बहिष्कार की मानसिकता ने निश्चित रूप से चीन को बड़ी आर्थिक समस्या में डाल दिया है।
स्वदेशी जागरण मंच द्वारा चलाये जा रहे विरोध अभियान में बाकायदा लोगों से चीन का सामान न खरीदने संबंधी एक संकल्पपत्र भी भरवाया जा रहा है।बड़ी बात यह है कि लोग स्वप्रेरणा से बड़ी संख्या में आगे आकर चीनी सामान न खरीदने का संकल्प ले रहे हैं।
चीनी वस्तुओं का बहिष्कार क्यों
भारत विश्व के 190 देशों से व्यापार करता है। उसमें सबसे बड़ा हिस्सा चीन का हो गया है भारत से चीन को केवल 9 बिलियन डॉलर का सामान जाता है और चीन से आता है 61.7बिलियन डॉलर यानी52.7बिलियन डॉलर का घाटा प्रति वर्ष जो रुपयों मैं होता है 3425 अरब रुपये
हमारे कुल विदेशी घाटे का 41 प्रतिशत अकेले चीन से है।
हमारे व्यापार में बाधा डालने के लिए चीन NSG में हमारा प्रवेश नहीं होने दे रहा है।
जेश ए मोहम्मद व उसके सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित नहीं होने दे रहा ।
1962 से हमारी 43000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा किए बैठा है । डोकलाम सहित उत्तराखंड लद्दाख आदि में हमारी 90000 किलामीटर भूमि को अपनी बताकर आये दिन घुसपैठ कर आंख दिखाता है। पाकिस्तान की भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ समर्थन करता है।