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अफीम की खेती से जुड़े ग्वालियर के बड़े कारोबारियों के नाम अंतरराष्ट्रीय तस्करों से सम्पर्क का संदेह

ग्वालियर /मध्यप्रदेश के ग्वालियर में अफीम की खेती के बढ़ते चलन ने अब प्रशासन की नींद उड़ा दी ही यूं तो पहले भी ग्वालियर अंचल में प्रशासन द्वारा अफीम की अवैध खेती को नष्ट करने के समाचार आते रहे हैं  लेकिन शनिवार को  शहर के जिस डोंगरपुर में 6 बीघा खेत पर अफीम की लहलहाती फसल को जिला प्रशासन ने पकड़ा है उसमें शहर के बड़े कारोबारियों और बिल्डर सहित एक  पूर्व डीजी के रिश्तेदार का नाम सामने आने के बाद इस बात की संभावना बढ़ गई है की कही इनके तार नशे का व्यापार करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह और कारोबारियों से नहीं जुड़े हैं। खेत पर अफीम की जो लहलहाती फसल सरकारी अमले ने पकड़ी है उसकी कीमत  कीमत करोड़ों में आंकी गई है।
उल्लेखनीय है की खेत में तैयार अफीम पर सबसे पहले सरकार का हक होता है, लेकिन अवैध अफीम ढंग से उगाई गई अफीम को अफीम तस्करों के हवाले कर दी जाती हैं।तस्करों को बेचने के लिए अफीम को सीक्रेट रूप से जमीन में दबा कर रखा जाता है। अफीम की सरकारी खरीद तो 1700-2500 रु. किलो के बीच है, लेकिन किसान को तस्करों से एक लाख रुपए प्रति किलोग्राम की आमदनी होती है। इसी लालच ने अफीम तस्करों की खेत तक घुसपैठ कर दी। वे यहीं से अफीम जुटाते हैं। सूत्रों का कहना है की चम्बल अंचल के कुछ बड़े कारोबारी जल्दी करोड़पति बनने के चक्कर में इस अवैध अफीम की खेती करने के कारोबार में कूद गए हैं। इनले सम्पर्क नशे के तस्करों से भी होने की खबरें आ रही हैं। फिलहाल ग्वालियर के जिस डोंगरपुर से 6 बीघा खेत से अफीम की  फसल को पकड़ा गया है उसे निगरानी में लेने के बाद नारकोटिक्स डिपार्टमेंट को सूचना दी गई। नारकोटिक्स की टीम ने फसल को जब्त कर लिया है। मौके से एक युवक को भी गिरफ्तार किया गया है। जमीन मालिक नहीं मिले हैं। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।

जिला प्रशासन को काफी समय से सूचना मिल रही थी, शहर के सिरोल स्थित डोंगरपुर में बड़े स्तर पर अफीम की पैदावर की जा रही है। इसके बाद टीम ने जानकारी जुटाई जब सूचना पुख्ता निकली, तो शनिवार दोपहर एसडीएम विनोद भार्गव व तहसीलदार कुलदीप दुबे के नेतृत्व में प्रशासन ने पुलिस फोर्स लेकर डोंगर पुर के खेतों में दबिश दे दी। डोंगरपुर में करीब 6 बीघा जमीन पर अफीम की फसल लहलहा रही थी।

यह देखकर प्रशासन के अफसरों की आंखें फटी रह गईं। मामला एनडीपीएस एक्ट का होने पर तत्काल मामले की सूचना नारकोटिक्स विभाग को दी गई। जिस पर वहां से सीनियर इंस्पेक्टर रजनीश शर्मा के नेतृत्व में टीमें डोंगरपुर पहुंची। यहां से फसल की रखवाली कर रहे पूरन कुशवाह को गिरफ्तार कर खेतों में खड़ी फसल को नष्ट कराया गया। साथ ही, वह अफीम जब्त कर ले गए। आरोपी को भी नारकोटिक्स विभाग अपने साथ ले गया। मौके पर मिली अफीम की कीमत 3 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।

इनकी जमीन पर हो रही थी अफीम की फसल

जिला प्रशासन की ओर से तहसीलदार कुलदीप दुबे ने बताया कि जिस जमीन पर अफीम की फसल हो रही थी वह डोंगर पुर के सर्वे क्रमांक 406, 407, 408 हैं। सर्वे क्रमांक 406 और 407 जानकी पत्नी दामोदर झवर के नाम पर है, जबकि सर्वे क्रमांक 408 तेज सिंह व कारोबारी सुनील गांधी के नाम पर है। अब इनकी भी नारकोटिक्स की टीमें तलाश कर रही हैं। इनमें झवर शहर के बड़े कारोबारी हैं। सुनील भी कारोबारी और बिल्डर्स होने के साथ-साथ एक पूर्व डीजी के रिश्तेदार बताए जाते हैं।

अन्य राज्यों में होती थी सप्लाई

नारकोटिक्स को संदेह है कि यहां अफीम की पैदावार कर इसे अन्य राज्यों में सप्लाई किया जाता था। अब कहां सप्लाई किया जाता था यह पता नहीं चला है। पकड़े गए किसान पूरन कुशवाह कुछ ज्यादा नहीं बता पा रहा है। नारकोटिक्स की टीम जमीन मालिकों पर एक्शन ले रही है।

क्या है अफीम
अफीम यानी काला जहर। इसके फूल सफेद होते हैं। भारत में राजस्थान व मध्यप्रदेश कई  गांवों में इसकी खेती जोरों पर चल रही है।
– कुछ चुनिंदा गांवों में ही डोडे(अफीम के फूल के नीचे उगने वाला हिस्सा) निकालने का काम होता है।
– तहकीकात में सामने आया कि तस्करी का नेटवर्क इन्हीं के खेतों के इर्द-गिर्द घूमता है।
– खेत में तैयार अफीम पर सबसे पहले सरकार का हक होता है, लेकिन सरकार को तय स्टॉक देने के बाद कई किसान बची हुई अफीम तस्करों के हवाले कर देतेे हैं।
– तस्करों को बेचने के लिए अफीम को सीक्रेट रूप से जमीन में दबा कर रखा जाता है।
– अफीम की सरकारी खरीद तो 2500 से 4000 रु. किलो के बीच है, लेकिन किसान को तस्करों से एक लाख रुपए प्रति किलोग्राम की आमदनी होती है।
– इसी लालच ने अफीम तस्करों की खेत तक घुसपैठ कर दी।
– देश में 34973 किसानों के पास हैं अफीम उत्पादन का लाइसेंस।
– मप्र लाइसेंस के मामले में है नंबर 1 वहां 17781 लाइसेंस।

 

 

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